आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने पथिक को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए कभी प़माद करना उचित नहीं है। Reply
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने पथिक को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए कभी प़माद करना उचित नहीं है।
‘श्वसन क्रिया सम’ ka kya meaning hai, please ?
सांस जैसे सहजता से लेते हैं ऐसे ही मोक्षपथ पर चलने वाले प्रमाद रहित सहजता से चलते हैं।
Bahut hi sundar post hai ! Namostu Acharya Shri !