श्री विद्यासागर जी के प्रवचन पहले बहुत जटिल होते थे। पर जैसे-जैसे उनकी आयु बढ़ती गई, प्रवचन सरल होते गये।
कहा भी है वृद्धावस्था बचपने का रेपिटिशन होता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 2 मई)
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प़वचन का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए प़वचन सरल भाषा में होना परम आवश्यक है।
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प़वचन का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए प़वचन सरल भाषा में होना परम आवश्यक है।