एक प्रसिद्ध फ़िल्म में डाकुओं के सरदार ने तीन डाकुओं को गोली मारी पर तीनों बच गये, तीनों बहुत खुश हुए। अचानक सरदार ने तीनों को गोली मार दी।
हम भी श्रद्धा, ज्ञान, चारित्र बढ़ाने वाली क्रियाओं से बच कर खुश होते हैं पर कर्म रूपी सरदार जब धराशायी करेगा तब !
चिंतन
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बच गये या मर गये को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए श्रद्बा ज्ञान, चारित्र की भावना रखकर कर्म करना परम आवश्यकता है।
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बच गये या मर गये को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए श्रद्बा ज्ञान, चारित्र की भावना रखकर कर्म करना परम आवश्यकता है।
Bahut hi accha aur relatable chintan hai !