मत/मन भिन्नता
शेर ने सब जानवरों से अपना चित्र बनवाया।
जिराफ़ के चित्र में शेर की पीठ थी। अन्य जानवरों के चित्र भी दायें, बायें, आगे, पीछे के भाग को दिखा रहे थे। अलग-अलग मत, पर मन भिन्नता नहीं (सभी एक ही शेर को दर्शा रहे थे)।
सिर्फ मुर्दों में मत भिन्नता नहीं होती। मत भिन्नता तो जीवित होने का प्रमाण है।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया




4 Responses
मत एवं मन भिन्नता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए मन भिन्नता नही होना चाहिए।
मत aur मन भिन्नता ke difference ko thoda aur explain karenge, please ?
मत तो अलग-अलग हो सकते हैं/ सापेक्ष होते हैं जैसे दिगंबर श्वेतांबर आदि पर एक दूसरे से वैमनस्य होना गलत है।
Okay.