राष्ट्रभाषा
एक सेठ ने अपने अंतिम समय में विशाल मीनार बनवाना शुरू किया। अलग-अलग प्रांतों से सबसे बेहतरीन ठेकेदारों को बुलाया गया। 1 साल का समय दिया। आर्थिक आदि किसी तरह की रुकावट नहीं थी फिर भी 3 महीने तक प्रगति नहीं हुई।
कारण ?
जब ईंट मांगी जाती तो पत्थर आ जाता क्योंकि अलग-अलग प्रांतों की भाषाएँ अलग-अलग हैं।
राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा होता है,फिर राष्ट्रीयता कैसे आएगी!
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 2 मार्च)




One Response
रास्टृभाषा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए रास्टृभाषा होना परम आवश्यक है।