मंदिर निर्माण

क्या वास्तु दोष भगवान के मंदिरों पर भी प्रभाव डालते हैं ?
वास्तु का अर्थ है भवन और मंदिर भी एक भवन ही है।
ग्वालियर के नए बाजार मंदिर में क्या वास्तुु दोष थे व पत्थर का वैभवशाली क्यों ?
1) मुख्य प्रवेश दक्षिण-पश्चिम में था।
2) मूलनायक प्रतिमा व अन्य प्रतिमाओं का मुख आग्नेय(अग्नि) कोण में था।
3) वॉशरूम(शौचालय) मंदिर की इमारत से चिपटा था।
4) कहीं पर भी, कुछ भी छोटा-मोटा निर्माण कर दिया गया था। जिससे भुजादोष लगता है जैसे लूला आदमी। 5) शिखर में दरारें पड़ गईं थीं। 6) पानी टपकता था।
7) सपोर्ट देने के लिए गर्डर लगाए जा रहे थे।
पत्थर का मंदिर इसलिए बनवाया जा रहा है ताकि हजारों साल चल सके क्योंकि 150-200 साल पुराना मंदिर बदलने का मानस और मौका जल्दी-जल्दी नहीं आता हालांकि करोड़ों वाली कार 2,4 वर्षों में बदल लेते हैं।
मंदिर वैभवशाली इसलिए ताकि संसारी रागी लोग आकर्षित हो सकें।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान- 10 अप़ैल)

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One Response

  1. मन्दिर निर्माण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सबसे बडा़ दान मन्दिर निर्माण का होगा।

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