अपाय/ उपाय विचय चौथे गुणस्थान में नहीं होता। जो खुद दुखों से बचने का उपाय नहीं कर रहा, वह दूसरों को बचाने का क्या/ क्यों भाव रखेगा !
हाँ ! यहाँ विपाक-विचय हो सकता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
Share this on...
4 Responses
विचय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अपने दुखों का उपाय करना परम आवश्यक है ताकि दूसरों के दुखों का निवारण किया जा सकता हैं।
विपाक यानी पकना/ कर्मों का पकना/ कर्मफल।
चौथे गुणस्थान में चाहे वह नरक में ही क्यों ना हो,अपने लिए/ दूसरों के लिए, दुखों को देखकर सोच तो सकता है ना कि दु:ख क्यों मिल रहे हैं… पूर्व में मैंने/ इन लोगों ने ऐसे कर्म किए थे, इसीलिए हम दु:ख पा रहे हैं।
4 Responses
विचय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अपने दुखों का उपाय करना परम आवश्यक है ताकि दूसरों के दुखों का निवारण किया जा सकता हैं।
‘विपाक-विचय’ ka meaning clarify karenge, please ?
विपाक यानी पकना/ कर्मों का पकना/ कर्मफल।
चौथे गुणस्थान में चाहे वह नरक में ही क्यों ना हो,अपने लिए/ दूसरों के लिए, दुखों को देखकर सोच तो सकता है ना कि दु:ख क्यों मिल रहे हैं… पूर्व में मैंने/ इन लोगों ने ऐसे कर्म किए थे, इसीलिए हम दु:ख पा रहे हैं।
Okay.