वैराग्य

पं.सहजानंद जी ने आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा –> आपको वैराग्य कैसे हुआ ?
आचार्य श्री –> भगवान/ गुरु के राग से।
पं.जी ने फिर पूछा –> कोई तो निमित्त बना होगा ?
आचार्य श्री –> तुम गृहस्थों के चेहरे देख कर।
पं.जी समझ गये वैराग्य के लिये आचार्य श्री के जीवन में कोई विशेष निमित्त नहीं है। ऐसे पुण्यात्मा तो पूर्व भव से ही वैराग्य लेकर आते हैं।

मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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4 Responses

  1. वैराग्य का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए वैराग्य भावना होना परम आवश्यक है, ताकि मौक्ष मार्ग पर चलने में सक्षम रहते हैं।

    1. तूने तो वन इस टू वन चर्चा भी कर ली, पड़गाहन भी कर लिया और क्या लेगी !

  2. Aur kuch nahi chahiye ! Namostu Acharya shri ! पड़गाहन ka credit to YK Jain Uncle ko jaata hai !

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