संसार

कत्ती* सूत भिगोकर लाई, बनिया ने मारी बट्टी**।
बनिया कहे मैंने कत्ती लूटी, कत्ती कहे मैंने बनिया।

प्रभात जैन की दादी जी

* चरखे पर सूत बनाने वाली। ** तराजू की डंडी मारना।

(संसार का स्वरूप ऐसा ही है। हर व्यक्ति एक दूसरे को धोखा देने में लगा है और धोखा देकर खुश हो रहा है। पर भूल जाता है कि वह भी धोखा खा रहा है, दूसरों के द्वारा या कल को कर्मों के द्वारा धोखा खाना पड़ेगा ही)।

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One Response

  1. संसार का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए मायाचारी से बचना परम आवश्यक है, ताकि कर्म का फल बुरा न हो सकें। धोका देना पाप की श्रेणी में आता है, उससे बचना परम आवश्यक है।

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