सकारात्मक सोच
पॉजिटिव थिंकिंग यह नहीं कि “मैं कर ही लूंगा” बल्कि वह जिसका रियलिस्टिक थिंकिंग से तालमेल हो।
जैसे इंटरव्यू में “मैं क्लियर कर ही लूंगा” नहीं, मैं कंपनी के फायदे की सोचूँगा, सेलेक्ट हो गया तो कंपनी का फायदा, सेलेक्ट ना होने पर भी अफ़सोस नहीं बल्कि सोचूँगा, यह तो कंपनी का ही नुकसान हुआ !
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 10 जून)




One Response
सकरात्मक सोच का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए हमेशा सकारात्मक सोच रखना परम आवश्यक है।