सापेक्ष…
तीन मित्र घूमने निकले।
घोंघा कछुए की पीठ पर, शिकायत करता रहा –> धीरे चलो।
साथ में खरगोश को कछुए से शिकायत थी ——> इतना धीरे क्यों चल रहे हो ?
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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सापेक्ष का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। कछूए एवं खरगोश की कहानी है। जीवन के कल्याण के लिए सापेक्ष का ध्यान करते हुए जो जीवन के लिए सुन्दर एवं आवश्यकता पर केन्द्रित होना परम आवश्यक है।
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सापेक्ष का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। कछूए एवं खरगोश की कहानी है। जीवन के कल्याण के लिए सापेक्ष का ध्यान करते हुए जो जीवन के लिए सुन्दर एवं आवश्यकता पर केन्द्रित होना परम आवश्यक है।