आगमानुसार जीव सुख-दु:ख का भोक्ता है।
यह भी कहा… यदि सुखी-दु:खी माना तो मिथ्यात्वी!
दोनों को कैसे घटित करें ?
सम्यग्दृष्टि जीव भी सुख-दु:ख तो भोगेगा, लेकिन भोगते समय सुखी-दु:खी नहीं होगा।
नीलेश भैया- सांगानेर
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सुखी -दुखी का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जीवन में सुख दुःख आते रहते हैं, इसके लिए समता का भाव रखना परम आवश्यक है।
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सुखी -दुखी का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जीवन में सुख दुःख आते रहते हैं, इसके लिए समता का भाव रखना परम आवश्यक है।