ज़िंदगी
ज़िंदगी समझ न आये, तो मेले में अकेला;
समझ आ जाये तो अकेले में मेला ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
ज़िंदगी समझ न आये, तो मेले में अकेला;
समझ आ जाये तो अकेले में मेला ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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One Response
ज़िन्दगी जन्म और मरण की सांसों में रहती हैं अतः जब समझ में आ जावे तो मेले में अकेला समझ आ जाता है तो अकेले में मेला नज़र आ सकता हैं।