इच्छा / इज़्ज़त
कुछ बड़ा चाहिये तो जो है उसकी महिमा बढ़ाओ (बखान करो)/ उसके विज्ञापन बनो।
जिस धर्म/ व्रतादि से तुम्हारी इज़्ज़त बढ़ी है, तुम उस धर्म/व्रतादि की इज़्ज़त बढ़ाओ।
(तुम्हारी इज़्ज़त और बढ़ेगी)
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
कुछ बड़ा चाहिये तो जो है उसकी महिमा बढ़ाओ (बखान करो)/ उसके विज्ञापन बनो।
जिस धर्म/ व्रतादि से तुम्हारी इज़्ज़त बढ़ी है, तुम उस धर्म/व्रतादि की इज़्ज़त बढ़ाओ।
(तुम्हारी इज़्ज़त और बढ़ेगी)
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी