इष्ट / अनिष्ट
इष्ट के साथ अनिष्ट भी जुड़ा रहता है जैसे प्रवचन इष्ट, इसमें अवरोध अनिष्ट।
बचपन में माँ इष्ट, बड़े होकर माँ अनिष्ट।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
इष्ट के साथ अनिष्ट भी जुड़ा रहता है जैसे प्रवचन इष्ट, इसमें अवरोध अनिष्ट।
बचपन में माँ इष्ट, बड़े होकर माँ अनिष्ट।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
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इष्ट/अनिष्ट को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अनिष्ट से बचाव करना एवं इष्ट के भाव रखना परम आवश्यक है।