आदिनाथ भगवान के महीनों के अंतराय (आहार में) को कर्म-फल मानें या कुछ और ?
संयोग भी हो सकता है। पार्श्वनाथ भगवान के पिछले 10 भवों में ऐसा कोई कर्म उन्होंने नहीं किया जिसके फलस्वरूप उन पर उपसर्ग हो।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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कर्म फलादि को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। भगवान् श्री पार्श्वनाथ ने कुछ भी गलत कर्म नहीं किया गया था, लेकिन उन्होंने उस फल को समता पूर्वक सहन किया गया था।अतः क्षावको को कष्ट में समता का भाव रखना परम आवश्यक है।।
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कर्म फलादि को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। भगवान् श्री पार्श्वनाथ ने कुछ भी गलत कर्म नहीं किया गया था, लेकिन उन्होंने उस फल को समता पूर्वक सहन किया गया था।अतः क्षावको को कष्ट में समता का भाव रखना परम आवश्यक है।।