कर्म वर्गणा

कर्म वर्गणाएँ एक रूप होती हैं।
बंधने के बाद चार रूप…

  • प्रकृति बंध…स्वभाव/ किस कर्म को बाधित करेगी जैसे बारिश जल सर्प मुख में विष रूप। दवा के Ingredients।
  • प्रदेश बंध… प्रदेशों की संख्या/ द्रव्य, कितनी गोलियाँ।
  • स्थिति बंध… दवा की Expiry Date।
  • अनुभाग बंध…शुभ-अशुभ की तीव्रता/ Potency।

मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थसूत्र – अध्याय 8.03)

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6 Responses

  1. कर्म वर्गणा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।

  2. ‘किस कर्म को बाधित करेगी जैसे बारिश जल सर्प मुख में विष रूप।’ Is sentence ka meaning thoda aur explain karenge, please ?

    1. महाराज जी का आशय रहा होगा कि प्रकृति कैसी है,कर्म वर्गणा है तो जल /बारिश की बूँद है लेकिन वहाँ जाकर विष बन गई इसकी प्रकृति ऐसी थी कि यह विष बन जाएगी, इस अपेक्षा एग्जांपल दिया होगा।

  3. Sarp waala example to clear ho gaya lekin ‘किस कर्म को बाधित करेगी’ ka meaning abhi bhi clear nahi hua ?Ise explain karenge, please ?

    1. प्रकृति क्या करती है? ज्ञानावरण ज्ञान पर आवरण डालेगा, दर्शनावरण दर्शन पर आवरण डालेगा तो यही तो स्वभाव है यही तो प्रकृति है।

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