हम सम्यग्दृष्टि हैं या मिथ्यादृष्टि, कैसे पता लगे ?
यदि समय के साथ कषाय घट रही है तो सम्यग्दर्शन हो गया या होने वाला है, बढ़ रही है तो मिथ्यादृष्टि। (पुराने नीम की कड़वाहट ज्यादा होती जाती है)
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
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2 Responses
कषाय का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु कषाय को समाप्त करना परम आवश्यक है ताकि सम्यगदर्शन हो सकता है एवं मिथ्या दृष्टि से बचाव हो सकता है।
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कषाय का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु कषाय को समाप्त करना परम आवश्यक है ताकि सम्यगदर्शन हो सकता है एवं मिथ्या दृष्टि से बचाव हो सकता है।
Bahut hi saral tareeka hai , hum ‘सम्यग्दृष्टि हैं या मिथ्यादृष्टि’, yeh pata karne ka ! Namostu
Gurudev !