धर्म / धर्मात्मा
धर्म से ज्यादा (जल्दी) कल्याण धर्मात्मा से।
नमोस्तु धर्म को, आशीर्वाद धर्मात्मा से।
पूजा धर्म की, फल धर्मात्मा बनने पर।
3 अनुयोगों (75% धर्मशास्त्र) में धर्मात्मा की चर्चा, 1 अनुयोग (द्रव्यानुयोग) में धर्म की।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी




4 Responses
धर्म/धर्मात्मा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। श्रावक धर्म को अपनाते हैं, लेकिन धर्मात्मा नहीं बन पाते हैं। जीवन का कल्याण धर्मात्मा बनकर ही हो सकता है। धर्मात्मा बनने के लिए धर्म पर श्रद्बा एवं समपर्ण होना परम आवश्यक है।
‘करणानुयोग’ me ‘धर्मात्मा’ की चर्चा kaise hai ? Yeh clarify karenge, please ?
जिसकी कषाय मंद हो दूसरा जिसके कर्मों की स्थिति अंतःकोड़ाकोड़ी सागर हो।
Okay.