कृत = किया हुआ।
हन = हँता/ विनाशक।
कृतघ्न = जो किये गये उपकार को नकार दे।
(कमल कांत)
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कृतघ्न को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु जो उपकार करता है, उसके प़ति कृतघ्न होना परम आवश्यक है। उपकार के लिए उसका एहसानमंद रहना परम आवश्यक है।
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कृतघ्न को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु जो उपकार करता है, उसके प़ति कृतघ्न होना परम आवश्यक है। उपकार के लिए उसका एहसानमंद रहना परम आवश्यक है।