गुरुदृष्टि
विहार चल रहा था। मुनि श्री संभवसागर जी 5:50 पर निकले। आचार्य श्री विद्यासागर जी 6:00 बजे।
बहुत देर तक आचार्य श्री पीछे-पीछे चलते रहे।
मिलने पर कहा… “बहुत देर से मैं तुम्हारे शरीर का X-Ray कर रहा था”
बहुत दिनों का साइटिका का दर्द ठीक हो गया। 12 साल से फिर कभी नहीं हुआ।
निर्यापक मुनि श्री संभवसागर जी




2 Responses
गुरु दृष्टि का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी की दृष्टि अपने सभी मुनियों पर हमेशा रहती है, जिसके कारण मुनियों भी अपना कल्याण करने में समर्थ रहते हैं। मुनियों के अतिरिक्त किसी भी प्राणी पर उनकी दृष्टि पड़ने पर उसका भी कल्याण हो जाता है।
Acharya shri ke charnon me shat shat naman !