दर्द
कांटे में तकलीफ़/दर्द नहीं, शरीर में भी नहीं।
जब कांटा शरीर में लगता है तब दर्द होता है।
आत्मा में दु:ख नहीं, शरीर में भी नहीं, जब आत्मा शरीर के साथ मिलती है तब दु:ख महसूस होता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
कांटे में तकलीफ़/दर्द नहीं, शरीर में भी नहीं।
जब कांटा शरीर में लगता है तब दर्द होता है।
आत्मा में दु:ख नहीं, शरीर में भी नहीं, जब आत्मा शरीर के साथ मिलती है तब दु:ख महसूस होता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
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One Response
दर्द का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आत्मा एवं शरीर को भिन्न समझना आवश्यक है। आत्मा में दर्द नहीं होता है क्योंकि समता का भाव रहता है। अतः कर्म सिद्धान्त पर आस्था रखना परम आवश्यक है।