नामकर्म प्रकृतियाँ

93 नामकर्म प्रकृतियों में से 13 अरहंत भगवान की 63 प्रकृतियों के क्षय के साथ समाप्त हो जाती हैं, बाकी 14 गुणस्थान में, ऐसा क्यों ?

सुरेख चंद्र – नोएडा

13 प्रकृतियाँ एकेंद्रिय/ विकलेंद्रिय/ नरक/ तिर्यंच सम्बंधी हैं (हल्की वाली/ स्थूल) उनका क्षय कम शुद्धि (9वें गुणस्थान तक) से हो जाता है। मनुष्य सम्बंधी 14वें गुणस्थान में क्षय होती हैं। उनकी ज़रूरत अंत तक रहती है जैसे मनुष्य-आयु आदि।

चिंतन

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One Response

  1. नामकर्म प़कतियों को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।

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