बौद्ध मत का पाँचवाँ शील बताया है…. मद्यपान-विरति,
जैन दर्शन में पांचवाँ……………………………… अपरिग्रह।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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पंचशील का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जैन दर्शन में अपरिग्रह का महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अपरिग्रह रखना परम आवश्यक है।
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पंचशील का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जैन दर्शन में अपरिग्रह का महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अपरिग्रह रखना परम आवश्यक है।