प्रमाद

प्रमाद….
कुशल (मंगलरूप, हितकारी कार्य) में अनादर।
प्रमाद से ही व्यसन, व्रतों में दोष।
प्रमाद होने पर विकथा आदि होने का नियम नहीं। लेकिन विकथा आदि हो रही है तो प्रमाद होगा ही।
6वें गुणस्थान का प्रमाद (अंतरंग) शुद्ध से शुभ-वृत्ति में आने से।
थकान दूर करने के लिये निद्रा प्रमाद नहीं।

 

मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – अध्याय 8)

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4 Responses

  1. प्रमाद को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु प्रमाद से बचना परम आवश्यकता है।

  2. Can meaning of “कुशल (मंगलरूप, हितकारी कार्य) में अनादर (सर्वाथसिद्धि)” be explained,
    please ?

    1. आशीर्वाद,
      मॉडिफाइड, अब देखो ठीक है…

      प्रमाद….
      कुशल (मंगलरूप, हितकारी कार्य) में अनादर।

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