परिग्रह
पाँचों पाप रोग-रूप हैं।
हिंसा, झूठ, चोरी और कुशील के तो लक्षण दिखते हैं और उनका इलाज सम्भव है, पर परिग्रह के लक्षण अंतरंग हैं। बाहर से कोई इलाज नहीं कर सकता।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
पाँचों पाप रोग-रूप हैं।
हिंसा, झूठ, चोरी और कुशील के तो लक्षण दिखते हैं और उनका इलाज सम्भव है, पर परिग्रह के लक्षण अंतरंग हैं। बाहर से कोई इलाज नहीं कर सकता।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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One Response
परिग्रह की विस्तृत परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सभी पाचों पाप का त्याग करना परम आवश्यक है। लेकिन परिग्रह का त्याग अंतरगं जानकर उसका भी त्याग करना परम आवश्यक है।