कर्म वर्गणा एक रूप बंधने के बाद चार रूप (प्रकृति, स्थिति, अनुभाग, प्रदेश)।
सबसे पहले प्रकृति बंधती है। किस गुण को बाधित करेगी जैसे ज्ञान, दर्शन आदि (8/148 प्रकृति)/ बादल का पानी सीप में मोती, सांप के मुंह में विष।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र 8/03)
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प्रकृति बंध को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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प्रकृति बंध को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।