बुढ़ापा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु मन में बुढ़ापा के भाव आना उचित नहीं रहते हैं।शरीर का विकास होना आवश्यक है, लेकिन शरीर अस्वस्थ है तो सल्लेखना का भाव रखना परम आवश्यक है।
मन कभी बूढ़ा नहीं होता, आदमी जब सोच लेता है मैं बूढ़ा हो गया, मन से हार जाता है तो बूढ़ा होता है वरना मन पर एज का कोई इफेक्ट नहीं होता,100 साल वाले का भी मन 20 साल वाले से बेहतर हो सकता है।
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बुढ़ापा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु मन में बुढ़ापा के भाव आना उचित नहीं रहते हैं।शरीर का विकास होना आवश्यक है, लेकिन शरीर अस्वस्थ है तो सल्लेखना का भाव रखना परम आवश्यक है।
Iska meaning thoda sa aur explain karenge, please ?
मन कभी बूढ़ा नहीं होता, आदमी जब सोच लेता है मैं बूढ़ा हो गया, मन से हार जाता है तो बूढ़ा होता है वरना मन पर एज का कोई इफेक्ट नहीं होता,100 साल वाले का भी मन 20 साल वाले से बेहतर हो सकता है।
Okay.