राग-द्बेष को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः श्रावकों को संसारिक राग से त्याग करना परम आवश्यक है। राग के लिए भगवान् पर करना परम आवश्यक है। Reply
राग तो शरीर से होता है, तब दृष्टि द्रव्य यानी आत्मा पर डालें तो राग कम होगा। किसी से द्वेष हो तो पर्याय-दृष्टि, पर्याय तो टेम्परेरी है इससे क्या दुश्मनी ! Reply
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राग-द्बेष को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः श्रावकों को संसारिक राग से त्याग करना परम आवश्यक है। राग के लिए भगवान् पर करना परम आवश्यक है।
Is post ka meaning clarify karenge, please ?
राग तो शरीर से होता है, तब दृष्टि द्रव्य यानी आत्मा पर डालें तो राग कम होगा।
किसी से द्वेष हो तो पर्याय-दृष्टि, पर्याय तो टेम्परेरी है इससे क्या दुश्मनी !
Okay.