लाड़ / डांट
लाड़ से खुशी सुरक्षित, डाँट से हित।
इसीलिये गुरु शिष्य को डाँट लगाकर रखते हैं।
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे…. पर डाँट इतनी तगड़ी मत लगा देना कि शीशी से दवा निकले ही नहीं(उद्देश्य पूरा होगा ही नहीं)।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
लाड़ से खुशी सुरक्षित, डाँट से हित।
इसीलिये गुरु शिष्य को डाँट लगाकर रखते हैं।
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे…. पर डाँट इतनी तगड़ी मत लगा देना कि शीशी से दवा निकले ही नहीं(उद्देश्य पूरा होगा ही नहीं)।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी