लाड़ / डाँट

लाड़ से खुशी सुरक्षित, डाँट से हित।

इसीलिए गुरु शिष्य को डाँट लगाकर रखते हैं।
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे…. पर डाँट इतनी तगड़ी मत लगा देना कि शीशी से दवा निकले ही नहीं(उद्देश्य पूरा होगा ही नहीं)।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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One Response

  1. लाड़/डांट को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन में लाड़ की जगह डांट लगाना परम आवश्यक है।डांट जीवन में सुधार के लिए आवश्यक है। लाड़ करने पर उसको बिगड़ने की सम्भावना रहती हैं।

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