किसी जीव का क्रोध अनंतानुबंधी का है, बाक़ी कषायें मंद दिखती हैं, पर बाकी कषायें भी आयेंगी मंद अनंतानुबंधी की श्रेणी में ही।
क्योंकि कषायों की तीव्रता गुणस्थानों से निर्धारित होती है, न कि बाह्य रूप से।
चिंतन
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3 Responses
कषायो की तीव्रता को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए कषायो की तीव्रता से बचना परम आवश्यकता है।
Iska matlab agar kisi jeev ka krodh ‘संज्वलन’ ka hai, to baaki kashayen teevra dikhengi to bhi wo ‘संज्वलन’ ki category me hi aayengi ? Ise clarify karenge, please ?
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कषायो की तीव्रता को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए कषायो की तीव्रता से बचना परम आवश्यकता है।
Iska matlab agar kisi jeev ka krodh ‘संज्वलन’ ka hai, to baaki kashayen teevra dikhengi to bhi wo ‘संज्वलन’ ki category me hi aayengi ? Ise clarify karenge, please ?
सही अगर थ्योरौटीकली क्रोध संज्वलन का है तो प्रैक्टिकली चारों कषायें संज्वलन की ही होंगी