विपाक
विपाक = फलानुभूति
भेद –>
- जीव विपाक = फलानुभूति जीव को जैसे ज्ञानावरणादि।
- पुद्गल विपाक = फलानुभूति पुद्गल के माध्यम से जैसे नामकर्म।
- क्षेत्र विपाक = गत्यानुपूर्वी।
- भव विपाक = आयुकर्म।
अनुभूति के बाद कर्मों की निर्जरा।
बंध –> कर्म बंध रहा है।
बद्ध –> कर्म बंध गया।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – अध्याय 8/23)



