शुरू में व्यवहार अंत में निश्चय।
एक बच्चा पिता के साथ मेला गया। बच्चा खिलौने के लिए जिद कर रहा था। थोड़ी देर में पिता अलग हो गए। बच्चा रोने लगा। बहुत सारे खिलौने देने पर भी बच्चा लेने को तैयार नहीं।
हमको भी मूल को प्राथमिकता देनी चाहिए।
ब्र. (डॉ.) निलेश भैया
Share this on...
One Response
व्यवहार,षष/निश्चय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है है। जीवन में सभी निश्चय पर भरोसा रखते हैं, लेकिन कुछ लोग व्यवहार में कोई रुचि नहीं रखते हैं ,ऐसे श्रावक अपना भला नहीं कर सकते हैं। जीवन के कल्याण हेतु निश्चय के साथ व्यवहार का पालना भी परम आवश्यक है।
One Response
व्यवहार,षष/निश्चय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है है। जीवन में सभी निश्चय पर भरोसा रखते हैं, लेकिन कुछ लोग व्यवहार में कोई रुचि नहीं रखते हैं ,ऐसे श्रावक अपना भला नहीं कर सकते हैं। जीवन के कल्याण हेतु निश्चय के साथ व्यवहार का पालना भी परम आवश्यक है।