शिथलाचार
श्री कषायपाहुड में आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी ने कहा है… उच्च साधना वाले तथा हल्की साधना वालों को एक श्रेणी में नहीं रखना चाहिये।
उच्च साधना निम्न की ओर जाने लगेगी। दो मुनियों ने विद्यायें साधी, पहले ने स्वीकार ली, दूसरे ने नहीं।
तब विद्याओं (देवता) ने दूसरे मुनि की पूजा की थी।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी




One Response
शिथलाचार का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु लक्ष्य प्राप्त करने हेतु शिथलाचार से बचना परम आवश्यक है।