जब अशुभ भाव आएँ तब चिंतन करें… मैं तो शुद्ध आत्मा हूँ।
शुभ होने का घमण्ड आए तो आत्मा के अशुद्ध पर्याय का।
क्षु. सहजानन्द जी
Share this on...
2 Responses
अशुभ/शुभ/अशुद्ध को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अशुभ भाव से बचना चाहिए एवं शुभ भाव रखना परम आवश्यक है। अतः जीवन के कल्याण हेतु में शुद्ध आत्मा हूं,इसका चिंतन करना परम आवश्यक है।
2 Responses
अशुभ/शुभ/अशुद्ध को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अशुभ भाव से बचना चाहिए एवं शुभ भाव रखना परम आवश्यक है। अतः जीवन के कल्याण हेतु में शुद्ध आत्मा हूं,इसका चिंतन करना परम आवश्यक है।
Bahut hi accha post hai ! Icchami Maharaj !