आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने संयम को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु ज्ञान के साथ संयम रखना परम आवश्यक है।मुक्ती हेतु सयम रखना परम आवश्यक है।
ज्ञान तो प्राण है पर जब संयम के साथ आ जाता है वह ज्ञानी मुक्ति को प्राप्त हो जाते हैं, वरना तो श्वान है। ज्ञान तो उसे भी है पर संयम नहीं, कहीं भी खा ले, कहीं भी कुछ कर ले, कहीं भी सोले।
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने संयम को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु ज्ञान के साथ संयम रखना परम आवश्यक है।मुक्ती हेतु सयम रखना परम आवश्यक है।
Is post ka meaning thoda aur explain karenge, please ?
ज्ञान तो प्राण है पर जब संयम के साथ आ जाता है वह ज्ञानी मुक्ति को प्राप्त हो जाते हैं, वरना तो श्वान है। ज्ञान तो उसे भी है पर संयम नहीं, कहीं भी खा ले, कहीं भी कुछ कर ले, कहीं भी सोले।
Okay.