सीख

धूप में छाँव का अनुभव करते हो या छाँव में धूप का डर रहता है ! डरेगा वह नहीं जिसके जीवन में भगवान/ गुरु की छत्रछाया होगी।
जो चंवर ढुलवाने की अपेक्षा नहीं रखते, उनके ही 64 चंवर ढुलते हैं।
जो है उसको छोड़ने की तैयारी है या जो नहीं है उसको और पाने की !

कर्तापने से बचकर ही मोक्ष हो सकता है।
एक राज्य में अकाल पड़ गया और पड़ोसी राजा आक्रमण करने आ पहुँचा। राजा अपने गुरु के पास गया, अपना दु:ख बताया। पर एक और परेशानी थी…उसका सेवक आराम से सोता था !
उत्तर… तू भी सेवक बन जा। सेवक मान कर राज्य चला, कर्ता बनकर नहीं।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 21 मई)

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One Response

  1. सीख का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए परमार्थिक सीख करना परम आवश्यक है।

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