आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने एवं मुनि श्री प़माणसागर महाराज जी ने स्त्री को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। नारी ही भगवान् को जन्म देती है, इसके अतिरिक्त पूरे परिवार को संस्कारो से जगाती हैं। स्त्री के भी कई रुप रहते हैं, मां, पत्नी,बहिन का रुप रहता है।संयम रखना परम आवश्यक है।
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने एवं मुनि श्री प़माणसागर महाराज जी ने स्त्री को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। नारी ही भगवान् को जन्म देती है, इसके अतिरिक्त पूरे परिवार को संस्कारो से जगाती हैं। स्त्री के भी कई रुप रहते हैं, मां, पत्नी,बहिन का रुप रहता है।संयम रखना परम आवश्यक है।