अज्ञान
ज्ञान के पहले “अ” लगने पर अज्ञान। जीव के पहले “अ” लगने पर “अजीव।
सो अज्ञान का संबंध अजीव से हुआ। जितनी अजीव की जानकारी, उतना अज्ञान।
ये अज्ञान हुआ मोहनीय संबंधी, दूसरा ज्ञानावरण का क्षयोपशम कम होने से, तीसरा मिथ्यात्व संबंधी।
आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी
मोक्षमार्ग में अजीव का ज्ञान उस सीमा तक ही प्रयोजनीय है, जहाँ तक वह जीव को अजीव से अलग होने में सहायक होता है।
कमलकांत




2 Responses
अज्ञान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अज्ञान का रास्ता छोड़कर ज्ञान का मार्ग अपनाना परम आवश्यक है।
Bahut hi insightful post aur chintan hai ! Vandami Mataji !