प्रसन्नता

आज सब अपनों में संलग्न, अपनों को प्रसन्न करने में लगे रहते हैं।
अपने को/ अपने लिए कुछ नहीं।
माँ बच्चों की प्रसन्नता में ही प्रसन्न। पति पत्नी को, पत्नी पति के लिए जीवन अर्पण। जबकि कोई भी “पर” को प्रसन्न कर ही नहीं सकता। यदि पति पत्नी खुद को प्रसन्न कर ले तो दोनों प्रसन्न हो सकते हैं।

ब्र. (डॉ.) नीलेश भैया

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3 Responses

  1. प्रसन्नता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु हर प्राणी को स्वयं प्रसन्नता होना परम आवश्यक है।जब स्वयं प्रसन्नता होने पर दूसरों को प्रसन्नता लाना आवश्यक है। अतः जीवन में प्रसन्नता लाना परम आवश्यक है।

    1. लगातार लगे रहते हैं दूसरों के लिए फुर्सत ही नहीं

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