अभिषेक
अभिषेक पांडुकशिला पर “श्री” लिखकर करना चाहिये। ताकि भगवान पर ढाया हुआ जल “श्री” को छूता हुआ आये।
क्योंकि अभिषेक श्रावकों के द्वारा श्रावकों के लिये होता है, उनको मोक्षलक्ष्मी के साथ-साथ श्रीलक्ष्मी भी चाहिये होती है।
ठोड़ी के नीचे कपड़ा लगाकर अभिषेक करना सही नहीं है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी




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अभिषेक को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अभिषेक के समय जो निर्यापक श्रमण श्री सुधासागर महाराज जी ने बताया है,उसका पालन करना चाहिए।।