आचरण
मन और पानी का एकसा स्वभाव होता है… जिन परिस्थितियों/ बर्तन में जाता है इसी का आकार ग्रहण कर लेता है। दूसरा… जहाँ ढलान मिल जाए वहीं चला जाता/ बहने लगता है।
यदि आकार को स्थिर रखना हो तो पानी को जमा देते हैं/ मन को संकल्पों से बांध देते हैं। तब पानी/ मन की 3D अवस्था हो जाती है… आचरण रूपी तीसरा डाइमेंशन भी आ जाता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 1 अक्टूबर)




4 Responses
आचरण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए मन को स्थिर रखने के लिए संकल्पों से बांधकर रखना परम आवश्यक है।
Is post me ‘मन’ ke context me ‘ढलान’ ka meaning explain karenge, please ?
मन का तो स्वभाव होता है नीचे की ओर जाना क्योंकि हमारे पुराने संस्कार ऐसे ही हैं यानी बुराइयों की तरफ जाने का निमित्त मिलते ही उधर ढलकने लगता है।
Okay.