आत्महत्या
क्या राजा श्रेणिक जो क्षायिक सम्यग्दृष्टि, तीर्थंकर प्रकृति का बंध किये हुए थे, उन्होंने आत्महत्या की होगी ?
कोई बाधा नहीं क्योंकि वे चौथे गुणस्थानवर्ती थे, उनके संयम नहीं होता है। इसलिये वे अपने प्राणों का घात कर सकते हैं।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
(आचार्य श्री विद्यासागर भी उनकी आत्महत्या का विरोध नहीं करते थे)।




One Response
आत्महत्या को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। जीवन के कल्याण के लिए आत्महत्या से बचना परम आवश्यक है।