विचार किया !… जरा से आलस से (बिजली न जलाना/ लापरवाही से चलना) हम अपने जूतों के नीचे कितने कीड़ों की लाशों को लेकर घूम रहे हैं!
कभी जूतों को पलट कर देखा !!
ब्र. डॉ. नीलेश भैया<र/p>
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आलस/हिंसा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आलस एवं हिंसा के मार्ग को त्याग करना परम आवश्यक है। जीवन में अहिंसा का मार्ग अपनाना परम आवश्यक है।
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आलस/हिंसा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आलस एवं हिंसा के मार्ग को त्याग करना परम आवश्यक है। जीवन में अहिंसा का मार्ग अपनाना परम आवश्यक है।