आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते हैं… आंख खोली तो पाप लगता है, पैर चले तो हिंसा।
तो क्या करें ?
कम से कम आंख खोलें। कमीज बदलते समय आंखें क्यों खोलना, बटन लगने से आँख में नुकसान भी अलग।
निरर्थक ना चलें।
मन तथा सारी इंद्रियों को शुभ में लगाए रखें।
चिंतन
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इन्द्रिय नियंत्रण को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु इन्द्रियों पर नियंत्रण करतें हुए शुभ कार्यों में लगाना परम आवश्यकता है।
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इन्द्रिय नियंत्रण को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु इन्द्रियों पर नियंत्रण करतें हुए शुभ कार्यों में लगाना परम आवश्यकता है।