इबादत को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु प़ार्थना अपनी इच्छाओं की पूर्ती हेतु से बचना चाहिए, बल्कि जो प्राप्त हुआ है,उसके लिए सन्तोष होना आवश्यक है, इसके लिए शुक़जार करना परम आवश्यक है। Reply
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इबादत को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु प़ार्थना अपनी इच्छाओं की पूर्ती हेतु से बचना चाहिए, बल्कि जो प्राप्त हुआ है,उसके लिए सन्तोष होना आवश्यक है, इसके लिए शुक़जार करना परम आवश्यक है।