उत्तम त्याग

  • दानी का सम्मान होता है, त्यागी पूजा जाता है,
    दान में बदले का भाव होता है, त्याग में नहीं,
    दान ऊपर से होता है जैसे पेड़ों की छटनी, ताकि पेड़ और बढ़ें, त्याग जड़ से होता है ।
  • दानी फल देने वाले पेड़ की तरह दूसरों को भी देता है और गिरे हुये फलों से खाद बनाकर अपना भविष्य और अच्छा कर लेता है, कंजूस आलू के पौधे जैसा जमा ही करता रहता है, जिसे चोर आदि पूरा नष्ट कर देते हैं ।
  • त्यागी मंदिर के शिखर जैसा होता है जिस पर कर्म के पक्षी नहीं बैठ पाते ।
  • औषधि, अभय , आहार और ज्ञान दान के बदले में लेने का भाव नहीं रहता ।

मुनि श्री सौरभसागर जी

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