उपदेश / ज्ञान
उपदेश पात्र तथा कुपात्र को भी, जैसे हो उसे ही व्यवस्थित करने।
ज्ञान पात्र को ही जैसा गुरु चाहते हैं, वैसा बनाने को।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
उपदेश पात्र तथा कुपात्र को भी, जैसे हो उसे ही व्यवस्थित करने।
ज्ञान पात्र को ही जैसा गुरु चाहते हैं, वैसा बनाने को।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी