पुलिस जब सज़ा देती है तो दिखाई देती है तथा उनका डंडा भी, वेदना तो होती ही है।
देवता दिखते नहीं सिर्फ़ डंडा दिखता है, वेदना बहुत।
कर्म जब फल देते हैं तब ना कर्म दिखते हैं ना ही डंडा, पर वेदना भयानक।
आर्यिका स्वस्तिभूषणमति माताजी
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कर्म -फल को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु कर्म ऐसे करना परम आवश्यक है जिससे परिणाम अच्छे मिल सकें।
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कर्म -फल को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु कर्म ऐसे करना परम आवश्यक है जिससे परिणाम अच्छे मिल सकें।
Bahut hi sundar comparison hai ! Vandami Mataji !